adarsh college hardua nawabganj

‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ इस मूलमंत्र से अनुप्राणित एवं ‘विद्या धर्मेण शोभते’ के संकल्प से संकल्पित आदर्श महाविद्यालय विकास के पथ पर अग्रसर नवोदित शिक्षण संस्थाओं में अपना विशिष्ट स्थान रखता है।
शिक्षा के माध्यम से हमारे कर्म प्रधान जीवन में एक दिव्य ज्योति का प्रादुर्भाव होता है जिसके अलौकिक सानिध्य में हम अपने उदास लक्ष्य को पाने में समर्थ हो जाते हैं। “अन्धतमः प्रविशन्ति येविद्यामुपासते ” ( ज्ञान के अभाव में कर्म करने वाले अंधकार में भटकते हैं) कहकर ईशावास्योपनिषद ने भी कर्म क्षेत्र में शिक्षा के महत्व को स्वीकार किया है। “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत” अर्थात उठो, जागो और श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त करो। कठोपनिषद के इस वक्त से प्रेरणा प्राप्त कर मन को दृढ़ एवं शिवसंकल्पवान करते हुए नवाबगंज की जनता ने अपने क्षेत्र के समग्र विकास के लिए उच्च शिक्षा प्रदान करने हेतु उच्च शिक्षा संस्थान की आवश्यकता अनुभव की। क्षेत्रीय जनता द्वारा देखे गए इस दिव:स्वप्न को क्षेत्रीय सांसद माननीय संतोष गंगवार ने 7 फरवरी 1994 ईसवी को स्थानीय शिशु मंदिर में आहूत नागरिकों की एक बैठक में अपना अभिमत देकर साकार रूप प्रदान किया। महाविद्यालय के निर्माण के लिए 17 फरवरी 1994 ई0 को श्री रविंद्र सिंह राठौर के आवास पर प्रथम औपचारिक बैठक संपन्न हुई। 17 जून 1994 को आदर्श शिक्षा समिति का विधिवत गठन होने के पश्चात हरदुआ निवासी श्री फकीर चंद्र जी द्वारा मुख्य मार्ग के समीप अपने भूखंड को प्रदान कर इस पुनीत कार्य को गति प्रदान की गई। उनका यह कार्य अनुकरणीय एवं सराहनीय रहा। तत्कालीन जिलाधिकारी श्री दीपक सिंघल द्वारा इस कार्य की पूर्णता हेतु की गई तत्परता भी अविस्मरणीय रही।

भूखंड उपलब्ध हो जाने पर क्षेत्र की जनता ने अभूतपूर्व उत्साह का परिचय देते हुए भवन निर्माण हेतु धन एकत्रित करने के कार्य को अतीव तत्परता के साथ संपन्न किया। 1 जनवरी 1995 को महाविद्यालय निर्माण हेतु भूमि पूजन संपन्न हुआ। उत्तर प्रदेश के तत्कालीन महामहिम राज्यपाल श्री मोतीलाल वोरा ने महाविद्यालय के भवन निर्माण का शुभारंभ 27 मार्च 1995 ईस्वी को शिलान्यास कर किया।

महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय द्वारा संबद्धता प्रदान करने हेतु नियुक्त निरीक्षण समिति द्वारा अप्रैल मास में निरीक्षण करने के पश्चात महाविद्यालय को 1 जुलाई 1996 से रोहिलखंड विश्वविद्यालय से स्थाई रूप से 8 विषयों में संबद्धता प्राप्त हो गई। परिणाम स्वरूप सत्र १९९६-97 में विद्यार्थियों के संस्थागत रूप में प्रवेश हुए तथा विद्यालय में परीक्षा केंद्र न होने के कारण विद्यार्थियों ने उपाधि महाविद्यालय , पीलीभीत केंद्र से परीक्षा संपन्न की।

आवश्यकतानुसार भवन निर्माण तथा दो सत्र पूर्ण कर लेने के पश्चात भी आदर्श महाविद्यालय लंबे समय से विधिवत उद्घाटन हेतु प्रतीक्षारत था। पर्याप्त प्रयासों के फलस्वरूप उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय कल्याण सिंह जी ने इस निमित्त अपनी सहर्ष स्वीकृति प्रदान की और दिनांक 12 मई 1998 को माननीय कल्याण सिंह जी के कर कमलों द्वारा महाविद्यालय का विधिवत उद्घाटन संपन्न हुआ। 8 मार्च 1999 को महाविद्यालय के वाणिज्य एवं कला संकाय भवन का शिलान्यास तत्कालीन कुलपति महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ।

महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त निरीक्षण समिति द्वारा निरीक्षण करने के पश्चात महाविद्यालय को सत्र 2001- 2002 से विज्ञान संकाय और वाणिज्य संकाय हेतु कक्षाएं संचालित करने हेतु अनुमति प्राप्त हो गई। परिणाम स्वरूप 2001- 2002 से महाविद्यालय में विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय की कक्षाएं विधिवत संचालित की जा रही है।

विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थी हितों को ध्यान में रखते हुए सन 2000 से महाविद्यालय को परीक्षा केंद्र घोषित कर दिया गया है। विगत 18 वर्षों से महाविद्यालय परीक्षा के उच्च आदर्शों का अनुपालन करते हुए सफलतापूर्वक विश्वविद्यालयीय परीक्षाओं को संपन्न करा रहा है।